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Saturday, May 9, 2015

वो परियों वाली जादू की छड़ी




वो परियों वाली जादू की छड़ी 
बचपन से आज तक कितनी बातें, अहसास और ख्यालों ने करवट ली है उनका तकाज़ा करना फज़ूल है पर तब्दीली के इस मजमे में  एक वो चीज़ जो आज भी वैसी ही है वो मेरी माँ की परियों वाली जादू की वो छड़ी है जो मैने कभी देखी तो नहीं है पर यक़ीनन वो कहीं तो है ये वो परियों वाली छड़ी थी  जो माँ हम सबसे छुपा के ना जाने कब घुमा देती थी और हर मुश्किल को आसान कर देती थी.......जब हमें डर लगता था, जब हम परेशान होते थे, जब हम भीड़ में खो जाते थे सहमे हुए, डरे हुए और अचानक से माँ का हँसता हुआ चेहरा और फिर कुछ भी याद नहीं..... ना वो डर, ना कोई उलझन,
 ना परेशानी......
वक़्त के साथ कितनी उलझनें, मुश्किलें और परेशानियाँ  आईं पर कभी डर नहीं लगा के अब क्या होगा? क्यूँकि मुझे माँ की उस जादू की छड़ी पे पूरा यकीन था कि जब सारी दुनियां मेरी उलझनों, मुश्किलों और सवालों के जवाब ढूंढ के थक जाएगी तब पल भर में मेरी माँ उस जादू की छड़ी से सब कुछ आसान कर देगी, हर सवाल का जवाब होता है माँ की उस छड़ी के पास....हैरान परेशान मुझे जाने कब हर सवाल से, हर उलझन से रिहाई मिल जाती है पता ही नहीं चलता....अब मैं जानती हूँ के दुनियां में ऐसी कोई चीज नहीं जिसका हल माँ के पास ना हो.....
 हाँ बस आज तक एक ही सवाल है जिसका जवाब में ढूंढ रही हूँ के मेरी माँ वो परियों वाली जादू की छड़ी छुपाती कहाँ है??????