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Friday, October 19, 2012

ओ प्यारी हँसी


ओ प्यारी हँसी 

ओ प्यारी मीठी हँसी, घुली घुली घर की दीवारों में हँसी,
नन्ही हथेली माथे पर रखती, प्यार से निहारती टुकुर टुकुर देखती हँसी,
पैरों में छन-छन, धप-धप  कर, ज़िन्दगी में मुस्कराहट लाती हँसी,
मिटटी के घरोंदो को, घर की तरह सजाती हँसी,
थकान शिकन माँ की मिटाती, हर काम में हाथ बटाती हँसी,
देहली पर दिए जलाकर, घर में रौशनी बिखेरती हँसी,
उत्साह में इठलाती घूमती, हर चेहरे से मायूसी चुराती हँसी,
माँ बाबा, दादी दादा, सबका ख्याल रखती लाडली हँसी, 
उम्मीदों को अस्तित्व में उड़ेलकर, सबके जीवन की इक प्यारी हँसी,
घर के चिराग की उम्मीद में, अंधेरो में सुला दी जाती हँसी,
क्यों सबकी नाराज़गी सहती, दुत्कार पाती औ चुपके चुपके रोती हंसी,
हाँ क्यों रोती हँसी? जब सबको हँसाती हँसी...........

2 comments:

  1. waaah kyaa baat hai... very nice ...
    -sudeep

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  2. उम्मीदों को अस्तित्व में उड़ेलकर, सबके जीवन की इक प्यारी हँसी,
    घर के चिराग की उम्मीद में, अंधेरो में सुला दी जाती हँसी,

    waah ! ek mithi hashi ki fuhaar aa rahi hai , apki sari rachano ko padh kar .. atyant kavyatmak aur sarjansheel hai apka lekhan .. bht hi aatur tha padhne ko .. aur .. sach janiye, aap meri umeeid se kahi jyda acha likhti ho :)
    waah
    saadar
    anurag trivedi ehsaas ..
    how to join ur blog ? thr is no tag of joing .. koi icon nahi dikh raha hai

    ReplyDelete