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Friday, October 19, 2012

आख़िरी तोहफा



आख़िरी  तोहफा 
आज ही ले जा अपनी बातें, यादें
वो झगडे, हँसी, नमी आँखों की,
तेरी याद में खुद से जूझती इक लड़की
और कशमकश शुरुआत की,
ले जा वो रातें बातों में जागती
कुछ शरारतें तेरी और पल में घुलती नाराज़गी उसकी,
वो ऊल- जूलूल बातें, बेफिक्र हँसी 
अचानक वो ज़िक्र संज़ीदा सा,
पल दो पल बातें मोहब्बत भरी 
उसके चौंकने पे ठहाके अपने,
ले जा वो  सारी बातें, यादें 
हँसी और नमी आँखों की..........
दिल्लगी में झलक दिखलाते वो अहसास
और ठहाकों पे ख़त्म होती  रात,
ले जा घंटो एक नासमझ लड़की को
समझाने की कोशिशें,
बहस में उलझी वो 
उस पे झल्लाती अपनी हँसी,
रोती आँखों को पोंछने की तकलीफें 
बेवजह उसे हँसाने की जद्दोज़हद औ  ज़िदें,
ले जा वो  सारी बातें, यादें 
हँसी और नमी आँखों की..........
वो हक़ नाराज़गी का, मनाने का 
वो हक़ छुपी मोहब्बत का, तक़रार का ,
हाल-ए-दिल की ख़बर तुझे न हो जाये 
ये डर हर बार का,
सताने पे तेरे, वो लरज़ते हर्फ़ उसके 
झुकी आँखे औ चेहरा शर्मसार सा,
हर लड़ाई पर मुसुकुराते चेहरे  पर,
वो मीठा अहसास प्यार का, 
ले जा वो  सारी बातें, यादें 
हँसी और नमी आँखों की............

1 comment:

  1. सेवी जी
    अत्यंत सहजता से प्रवाह जो उठा भाव का, अपनी समग्रता लिये, पंक्ती दर पंक्ती भाव में तैरती हुई पंक्तीयाँ अपनी आखरी मोड तक ले कर गई
    बहुत खुब ........ मर्मस्पर्शी !!
    सादर
    अनुराग त्रिवेदी एहसास

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