मेरा बचपन
इक हवा मेरे दरीचे की, इक चाँद मेरे हिस्से का
वो खुशबू मेरे पैरहन की, इक आधा सूरज की किरणें
इक गुच्छा गुलमोहर का, तीन सूखी पत्तियाँ पीपल की
चार बूंदें बारिश की, इक मुट्ठी सोंधी खुशबू मेरे आंगन की
सात तारे हथेली भर आसमां में, सात रानियाँ इक कहानी की
दो परियां, इक गोरी, इक काली, दो बूंद पानी हंसती आँखों में नानी के
दो चम्मच हंसी होंठों पर, इक पतली डंडी डांट की
इक कटोरी माँ की लोरी की, और इक थाली ममता की
एक बांह की स्वेटर लेकर भागी थी मोती हंसी के उड़ेल के
दिन, दोपहर, शाम भरी शरारतों की, छुपने को काँधा बाबा का
वो पगडंडियाँ गीली मिट्टी की, एक दुशाला माँ की खुशबू का
हरी भरी चाय की क्यारियां, वो काली डंडी बूढ़े काका की
वो भीगी सुबह, इक चादर काले बादल की
सुफैद कुहासा ठंडी सुबहों का, चार कदम, दो मेरे, दो मेरी बहन के
एक पल नोंक झोंक भरा, चार रातें मोहब्बत की
इक कुर्सी सुकून की, वो बिस्तर मीठी नींदों का
दो हरे कंचे मेरे डिब्बे में, वो घर मेरा मिट्टी का
तीन झूले सावन के, चार मुट्ठी चावल चोरी के
तह भर कर फटी चटाइयाँ, धूल भरी पढ़ाई स्कूल की
एक काला श्यामपट्ट मासूमियत का, सुफैद चॉक से लिखी चार पंक्तियाँ जीवन की
गीली आँखें बीते लम्हात की, याद समेटता इक ठहाका आज का
वो दिन बचपन के, खुशबू भरा कमरा याद का......

खूब से भी खूबत्तर .... !
ReplyDeletethank you sumit and anurag sir :)
ReplyDeletebahut sunder di....... mazaa aa gaya....... :)
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