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Friday, June 6, 2014

वो मुलाकात


वो मुलाकात 



मेरा तुमसे मिलना जितना जरूरी था
उतना ही जरूरी था अनजान बने रहना
पहली मुलाकात में वो तक्कलुफ़्फ़,
कैसे कह देती हर बार ख्यालों में अपने तक्कलुफ़ कि तहों को
एक एक कर तुम्हारे सामने खोल के बैठ जाती हुँ
कैसे कहती कि मैं तुमसे पहली बार नहीं मिल रही
हर रोज़ तुम्हारा तस्सवुर , तुम्हारा चेहरा,
तुम्हारा ख्याल मेरी आदत है
जब तुमने मेरा नाम पूछा था, अचानक झुकती पलकें उठ गईं थी
जाने वो ख़ुशी थी कि तुम मेरा नाम पुकारोगे
या टीस कि जिसका नाम अपने नाम के साथ जोड़ के
दिन में हज़ार बार पागलों कि तरह मुस्कुराती हुँ
वो मेरे नाम से भी बेख़बर है,
ख़ैर इस मुलाकात में बहुत तक्कलुफ़्फ़ था,
जब ख्यालों में आना तो अपनी अना, अपना नाज़, और रसूख़ छोड़ के आना
अज़नबियों कि तरह नहीं इक बार फिर मेरा वज़ूद बन के आना......

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